वर्नल इक्विनॉक्स की मुख्य विशेषताएं

"वसंत विषुव" दो शब्दों से मिलकर बना है: 'वसंत' (Spring) और 'विषुव' (Equinox)। संस्कृत में 'विषुव' का अर्थ है "दिन और रात का समान होना". वैज्ञानिक दृष्टि से, यह वह क्षण है जब सूर्य सीधे पृथ्वी की (Equator) के ऊपर होता है.

भारत एक कृषि प्रधान देश होने के साथ-साथ त्योहारों का देश भी है। वसंत विषुव भारतीय संस्कृति में 'वसंत पंचमी' और नए साल के त्योहारों से जुड़ा है। यद्यपि वसंत पंचमी आमतौर पर फरवरी में मनाई जाती है, लेकिन वसंत विषुव (मार्च) के समय भारत के विभिन्न हिस्सों में नए साल का आगमन मनाया जाता है। उदाहरण के लिए:

खगोल विज्ञान और प्रकृति के चक्र में 'वसंत विषुव' (Vernal Equinox) का विशेष स्थान है। जब पृथ्वी अपनी धुरी पर घूर्णन करते हुए सूर्य की परिक्रमा करती है, तो कुछ विशेष क्षण आते हैं जब दिन और रात की अवधि लगभग बराबर हो जाती है। इन क्षणों को 'विषुव' कहा जाता है। वर्ष में दो प्रमुख विषुव होते हैं: वसंत विषुव और शरद विषुव। उत्तरी गोलार्ध में, वसंत विषुव आमतौर पर 20 या 21 मार्च को आता है। हिंदी में 'Vernal Equinox' का शाब्दिक अर्थ है—'वसंत का विषुव'। यह न केवल एक खगोलीय घटना है, बल्कि यह सांस्कृतिक, धार्मिक और पर्यावरणीय दृष्टिकोण से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।

पृथ्वी अपनी धुरी पर 23.5∘23.5 raised to the composed with power

भारतीय ज्योतिष शास्त्र में भी वसंत विषुव का विशेष महत्व है। यह सूर्य की मेष राशि में प्रवेश का समय माना जाता है, जिसे 'मेष संक्रांति' कहते हैं। यह सूर्य के उत्तरायण काल के बाद का एक महत्वपूर्ण चरण है। इस दिन से सूर्य का प्रभाव और अधिक प्रबल होने लगता है, जिसे आयुर्वेद में स्वास्थ्य के लिए भी अच्छा माना जाता है।