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Kabristan Me Fatiha Ka Tarika !link! Jun 2026इसके बाद 1 बार सूरह फातिहा पढ़ें। कब्रिस्तान जाना न केवल मरने वाले के लिए दुआ का जरिया है, बल्कि यह हमें अपनी आखिरत (मृत्यु के बाद का जीवन) की याद दिलाने का एक बेहतरीन माध्यम भी है। पैगंबर मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फरमाया कि कब्रिस्तान जाया करो क्योंकि यह मौत की याद दिलाता है। kabristan me fatiha ka tarika आखिर में फिर से 3 बार वही दरूद शरीफ पढ़ें जो शुरू में पढ़ा था। मैंने जो कुछ भी पढ़ा है 3. ईसाले-सवाब (फातिहा) पढ़ने का तरीका इसे कुबूल फरमा।" पढ़ने के बाद हाथ उठाकर अल्लाह से दुआ करें। दुआ में कहें: "ऐ अल्लाह, मैंने जो कुछ भी पढ़ा है, इसमें जो गलतियां हुई हों उन्हें माफ फरमा और इसका सवाब (Reward) इस मरहूम (मरने वाले का नाम लें) की रूह को पेश करता हूँ, इसे कुबूल फरमा।" |
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